नई दिल्ली | 30 अगस्त 2026
भारत में डिजिटल शिक्षा को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक नई राष्ट्रीय पहल शुरू करने की घोषणा की है। इस कार्यक्रम के तहत देश के सरकारी स्कूलों में डिजिटल संसाधनों, स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक शिक्षण तकनीक को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को बदलती तकनीकी दुनिया के लिए तैयार करना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है।
नई पहल के अंतर्गत ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित स्कूलों को प्राथमिकता देने की योजना बनाई गई है। इन स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल स्क्रीन, कंप्यूटर और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके अलावा शिक्षकों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि वे डिजिटल माध्यमों का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल कर सकें।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में तकनीक ने पढ़ाई के पारंपरिक तरीकों को काफी बदल दिया है। ऑनलाइन वीडियो, डिजिटल पुस्तकें, इंटरैक्टिव क्विज और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शैक्षणिक उपकरण विद्यार्थियों के लिए सीखने को अधिक आसान और रोचक बना सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि तकनीक को शिक्षक और पारंपरिक शिक्षा का विकल्प बनाने के बजाय एक सहायक माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
सरकार के प्रस्तावित कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए स्थानीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री तैयार करने पर भी जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य उन छात्रों तक गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री पहुंचाना है, जिन्हें अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध संसाधनों को समझने में कठिनाई होती है। हिंदी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में सामग्री उपलब्ध होने से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।
अभिभावकों ने भी डिजिटल शिक्षा से जुड़ी इस पहल को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यदि स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं और शिक्षकों को उचित प्रशिक्षण मिलता है, तो बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकता है। वहीं कुछ अभिभावकों ने डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग और बच्चों के स्क्रीन टाइम को लेकर चिंता भी जताई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल शिक्षा को सफल बनाने के लिए केवल उपकरण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। इंटरनेट की विश्वसनीय सुविधा, शिक्षकों का प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण सामग्री और विद्यार्थियों की डिजिटल सुरक्षा पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।
सरकार के अनुसार, इस कार्यक्रम की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी और जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव किए जाएंगे। आने वाले महीनों में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्कूलों में इसके अलग-अलग चरण लागू किए जाने की योजना है।